Remembering the mother!

I do try, though. There are days when I stand in the barren living room or the kitchen and I keep looking. The rooms might be empty but they are haunted by your memories and a multitude of physical reminiscences, too … It’s a pity that I’ll never get to see you scorn when I wished you Happy Mother’s Day. It’s a pity that you had to go too fast and too soon. It’s a pity that I didn’t even get the chance to say a goodbye …

दादी का घर!

अगले दिन रवानगी है। तभी बात ही बात में बच्चे अपनी माँ से पूछ बैठते हैं, “कल दादी के घर पहुँच जायेंगे न?” …
असली सास-बहू ऐसी होती हैं, टीवी सीरियलों वाले नकली और खोखले किरदारों से एकदम अलग। यह भारतीयता है, भारतीय आचार है, भारतीय परिवार है …

स्त्रीत्व और पुरुषत्व

स्त्री सृष्टि की जिजीविषा को मूर्त रूप देने वाली है।फिर उसका पोषण भी करने वाली है।स्त्री प्रकृतिस्वरूपा है, निसर्गतः माननीया है। उसे माँ कह कर पूज्या समझना बहुत अच्छा है। लेकिन इसकी ओट में उसके बाकी किरदारों के सम्मान का हक़ मारना हमारे समाज की मूल खामी है। बहन के रूप में फिर भी उसकी कुछ…