जिनसे महका हिन्दुस्तान …

आज गाँधी को नमन किया जाता है, करना भी चाहिए। कैसा करिश्माई व्यक्तित्व! बिना किसी तड़क-भड़क के लाखों लोगों की एकता का प्रतीक! किसी की दो पन्क्तियाँ याद हो आती हैं – चल पड़े जिधर दो पग डगमग, चल पड़े कोटि पग उसी ओर पड़ गयी जिधर भी एक दृष्टि, गड़ गए कोटि दृग उसी…

स्त्रीत्व और पुरुषत्व

स्त्री सृष्टि की जिजीविषा को मूर्त रूप देने वाली है।फिर उसका पोषण भी करने वाली है।स्त्री प्रकृतिस्वरूपा है, निसर्गतः माननीया है। उसे माँ कह कर पूज्या समझना बहुत अच्छा है। लेकिन इसकी ओट में उसके बाकी किरदारों के सम्मान का हक़ मारना हमारे समाज की मूल खामी है। बहन के रूप में फिर भी उसकी कुछ…

हिन्द में एक दिवस : हिन्दी के लिए

सुनिए… गुनिये… मिलकर चलिए… अपने देश के लिए… अपनी भाषाओं के लिए… अपनी पहचान के लिए… अपनी एकता के लिए… अपने लिए… अपने बच्चों के भविष्य के लिए… केवल आज नहीं, हर दिन… हमारी भाषाएँ हमें आशीष देती रहें… !! 🙂