तीस्ता मैं …

तीन स्रोतों से मुझे है नाम मिलता,
सृषि के तीनों गुणों को हूँ समेटे,
मैं नदी हूँ …
यह प्रवाहोल्लास मेरा!
भङ्गिमा कल्लोलिनी मेरी! …
पाट मेरा, घाट मेरे,
सोच, फिर! प्रतिघात मेरे …
तीस्ता मैं …