स्त्रीत्व और पुरुषत्व (हिन्दी) | Womanhood and Manhood (Hindi)

स्त्री सृष्टि की जिजीविषा को मूर्त रूप देने वाली है।फिर उसका पोषण भी करने वाली है।स्त्री प्रकृतिस्वरूपा है, निसर्गतः माननीया है। उसे माँ कह कर पूज्या समझना बहुत अच्छा है। लेकिन इसकी ओट में उसके बाकी किरदारों के सम्मान का हक़ मारना हमारे समाज की मूल खामी है। …

हिन्द में एक दिवस : हिन्दी के लिए

सुनिए… गुनिये… मिलकर चलिए… अपने देश के लिए… अपनी भाषाओं के लिए… अपनी पहचान के लिए… अपनी एकता के लिए… अपने लिए… अपने बच्चों के भविष्य के लिए… केवल आज नहीं, हर दिन… हमारी भाषाएँ हमें आशीष देती रहें… !! 🙂

देखें – सोचें – लौटें … जड़ों से जुड़ने को..

बदलते भारत की बदलती तस्वीर की कीमत… हम ही ने चुकाई है.. क्या हम ही न सोचें… एक दौर का सफ़र देखें.. चलें हमारे साथ.. जड़ों को तलाशें… उसके बाद… “सोचियेगा ज़रूर”…