जुगनू

गर्मी की छुट्टियों का पहला दिन गाँव में कब निकल गया, पता ही नहीं चला। हर दिन की तरह रात होते ही वो आज भी गद्दे और बिछौने लेकर छत पर चला गया और अपने दादी-दादा के पास आकर लेट गया …

तीस्ता मैं …

तीन स्रोतों से मुझे है नाम मिलता,
सृषि के तीनों गुणों को हूँ समेटे,
मैं नदी हूँ …
यह प्रवाहोल्लास मेरा!
भङ्गिमा कल्लोलिनी मेरी! …
पाट मेरा, घाट मेरे,
सोच, फिर! प्रतिघात मेरे …
तीस्ता मैं …

A Conversation with Jayanta Mahapatra

At the age of almost 40, poet Jayanta Mahapatra conquered the world with his poetry. A combination of brevity and sharpness that he derived from physics (his subject) and the gift of a strong vocabulary took this poet to places and stages one can only imagine. His poems have been silent protests and an eye-opener for many. Our conversation with the legendary poet’s life, lessons and poetry …

जोखनी की माँ

‘जोखनी की माँ’ दरअसल हमारे घर की ‘आपातकालीन सुविधा’ थी जो हमारी कामवाली बाई के अचानक काम पर न आने से चार बच्चों वाले घर में मची अफ़रातफ़री को कम करने में अम्मी का हाथ बँटा देती थी । वो मुझे और मेरी बहनों को ‘मईयाँ’ कहती थी। …

ख़ुदा की चाल

अगर सोचो हक़ीक़त में, ख़ुदा की चाल निकली तो.. हमारा साँस लेना क्या पता मालूम करना हो ! कि जैसे हम.. हर इक शय जाँचते हैं और परखते हैं.. ख़ुदा हमको बनाकर उम्र भर बस देखता हो तो ! अगर उसकी निगाहों में ग़लत शय हम भी निकले तब, हमारे साँस लेने का कोई मतलब…